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Sunday, July 29, 2012

सायना नेहवाल की लंदन ओलंपिक में जीत से आगाज

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सायना नेहवाल की लंदन ओलंपिक में जीत से आगाजलंदन। भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल ने रविवार को लंदन ओलम्पिक की महिला एकला स्पर्धा में जीत के साथ आगाज किया। सायना ने पहले ग्रुप मुकाबले में स्वीट्जरलैंड की सबरीना जैक्वेट को सीधे गेम में 21-9, 21-4 से हराया। वेम्बले ऐरना में खेला गया यह मैच 24 मिनट चला।

ज्वाला गुट्टा और वी दीजू की मिश्रित युगल जोड़ी को हालांकि अपने दूसरे ग्रुप मुकाबले में भी हार मिली। गुट्टा और दीजू को डेनमार्क के जुहल रायटर और थॉमस लेबोर्न की जोड़ी ने 21-12, 21-16 से हराया। यह मैच 30 मिनट चला।पहले ग्रुप मैच में ज्वाला और दीजू को इंडोनेशिया की तोंनतोवी अहमद और लीलीआना नात्शी के हाथों 16-21, 12-21 से हार मिली थी।

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Saturday, February 4, 2012

क्रिकेट खेल है जंग नहीं

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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर सर डान ब्रैडमैन से बड़ा दूसरा खिलाड़ी न हुआ, वर्ष 2000 से ऑस्ट्रेलिया में उनकी स्मृति में ब्रैडमैन व्याख्यान का आयोजन किया जाता रहा है. इस आयोजन में क्रिकेट व अन्य क्षेत्रों की विभूतियां सर डान ब्रैडमैन व क्रिकेट के विषय पर अपने विचार व्यक्त करती हैं.
इस वर्ष के ब्रैडमैन व्याख्यान में पहली बार किसी विदेशी क्रिकेट खिलाड़ी के रूप में भारत के राहुल द्रविड़ को इस संबोधन का सम्मान दिया गया.14 दिसंबर 2011 को ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में आयोजित इस व्याख्यान में राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट के अलावा विश्व इतिहास, समाज, संस्कृति व मानव शास्त्र में अपनी बारीक समझ का प्रमाण भी दिया. राष्ट्रीय युद्ध स्मारक प्रांगण जैसे आयोजन स्थल की गरिमा के अनुरूप युद्ध की गंभीरता को समझने वाले राहुल द्रविड़ ने किसी क्रिकेट मैच के वर्णन के लिए युद्ध, जंग या महासंग्राम जैसे वजनी शब्दों के उपयोग को निर्थक बताया.
इतिहास के अच्छे जानकार की तरह द्रविड़ ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के सैन्य सहयोग का भी उल्लेख किया, जो 20 वीं सदी के दोनों विश्व युद्धों के दौरान भारत व ऑस्ट्रेलिया ने बनाये थे. द्रविड़ ने स्वाधीनता पूर्व भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध सर डान ब्रैडमैन के क्रिकेटीय करिश्मे से भारतीयों के भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र किया और यह भी कहा कि उस समय सारे भारतीय सर डान ब्रैडमैन को एक प्रकार से अपना प्रतिनिधि ही समझते थे. भारतीय क्रिकेट के एक बेहतरीन ब्रांड अंबेसडर राहुल द्रविड़ ने पिछले 25 सालों में भारत में क्रिकेट प्रतिभा के व्यापक फ़ैलाव और छोटे-छोटे कस्बो-शहरों से नये खिलाड़ियों के टीम में आने के अनेक उदाहरण दिये. द्रविड़ ने भारत के क्रिकेट खिलाड़ियों के सिर चढ़े व अति धनाढ्य होने को भी अतिशयोक्ति बताया.
द्रविड़ ने सबसे ज्यादा तारीफ़ भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को दी, द्रविड़ के अनुसार भारत के क्रिकेट प्रशंसक अपनी टीम व क्रिकेट खेल को बेहद प्यार देते हैं. हर भारतीय क्रिकेटर अपने कैरियर के दौरान यह समझ जाता है कि भले ही क्षणिक आवेश में कुछ लोग अप्रिय स्थिति पैदा कर दें, किंतु अधिकतर भारतीय प्रशंसकों की भावनाएं टीम के साथ जुड़ी हुई हैं. भारतीय क्रिकेटर के लिए यह खेल रोजगार का साधन मात्र नहीं है बल्कि यह अपने जीवन का सदुपयोग करने का अवसर है, ऐसा अवसर कितने लोगों को मिल ही पाता है ? राहुल द्रविड़ ने भारतीय खिलाड़ियों के मानवीय पक्ष को जिस रूप में जिया है ठीक उसी रूप में उसे प्रस्तुत भी किया. अखिल विश्व में अपने पंगु नेतृत्व व भ्रष्ट संचालन के लिए बदनाम बीसीसीआइ को भी कूटनीतिज्ञ द्रविड़ ने सराहा और भारत में क्रिकेट के प्रसार में इस बोर्ड के प्रयासों का जिक्र किया.इस संबोधन के दौरान राहुल द्रविड़ ने किसी बेहद कुशल रणनीतिकार की भांति ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सुरक्षित भविष्य के लिए एक नयी कार्यनीति का प्रतिपादन भी किया.
राहुल द्रविड़ ने क्रिकेट अधिकारियों व खिलाड़ियों को क्रिकेट प्रशंसकों के प्रति अपनी जवाबदेही की ओर सजग होने को कहा और हर अंतरराष्ट्रीय दौरे में जबरन ठूंसे हए अनेक एक दिवसीय व 20- ट्वेंटी मैचों की संख्या घटाने को कहा. टेस्ट मैच को क्रिकेट की सर्वोच्च प्रतिस्पर्धा बतानेवाले द्रविड़ ने खुले तौर पर कहा कि गैर जरूरी एक दिवसीय या 20- ट्वेंटी मैचों के चलते ही मैदान में दर्शकों की संख्या बेहद कम हो गयी है. टेस्ट में और दर्शकों को लाने के लिए द्रविड़ ने रात-दिन के टेस्ट खेलने की भी वकालत की. राहुल ने क्रिकेट की स्थिति बनाये रखने के लिए टेस्ट पर सबसे ज्यादा ध्यान देने को कहा,एक दिवसीय मैचों को वर्ल्ड कप या चैंपियन ट्राफ़ी जैसी प्रतियोगिताओं के लिए उपयुक्त बताया जबकि 20-ट्वेंटी को राष्ट्रीय स्तर पर सीमित रखने को कहा. राहुल के अनुसार क्रिकेट के तीनों प्रारूप साथ-साथ रह सकते है किन्तु जैसे अभी चल रहे है वैसे नहीं.
राहुल द्रविड़ के भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा खेल में बेईमानी और मैच फ़िक्‍सिंग को रोकने के बारे में था. द्रविड़ ने खिलाड़ियों से और कड़े परीक्षणों व नियमों को स्वीकार करने को कहा. राहुल द्रविड़ ने इस खेल की शुचिता के लिए क्रिकेट खिलाड़ियों से कुछ असुविधाओं व अपनी निजी जानकारी प्रदान करने को तैयार रहे को भी कहा. द्रविड़ ने क्रिकेट की आय बढ़ाने के के नये तरीकों की आवश्यकता स्वीकार की किन्तु साथ ही क्रिकेट की गौरवशाली परंपरा को बनाये रखने की अपील भी की. राहुल द्रविड़ का व्याख्यान ठीक उनकी बल्लेबाजी की तरह शास्त्रीय शैली में दिया गया स्पष्ट भाषण था. ऑस्ट्रेलिया के स्थानीय समाचार माध्यमों में राहुल द्रविड़ के इस संबोधन को ब्रेडमैन व्याख्यान में अब तक दिये गये सभी भाषणों में से सर्वश्रेष्ठ माना गया है. क्रिकेट मैदान के ‘श्रीमान भरोसेमंद’ द्रविड़ ने अपने संबोधन से यह साबित किया कि इस ‘भारतीय दीवार’ की बौद्धिक योग्यता और सैद्धांतिक मान्यताओं की नींव कितनी गहरी और कितनी मजबूत है.


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Thursday, November 24, 2011

मुंबई टेस्टः तीसरे दिन का खेल खत्म, सचिन का अर्धशतक

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भारत-वेस्टइंडीज के बीच हो रहे तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन वेस्टइंडीज की पहली पारी में 590 रनों के विशाल स्कोर के जवाब में मेजबान भारत ने तीसरे दनि का खेल खत्म होने तक पहली पारी में 3 विकेट के नुकसान पर 281 रन बना लिए थे।


क्रीज पर सचिन 67 और लक्ष्मण 32 रन बनाकर मौजूद थे। द्रविड़ 82 रन बनाकर आउट हुए। सहवाग 37 रन बनाकर सैमी की गेंद पर बोल्ड हुए जबकि गंभीर 55 रन बनाकर रामपॉल की गेंद पर आउट हुए। हालांकि गंभीर अंपायर के गलत फैसले के शिकार हुए। जिस गेंद पर गंभीर कैच आउट हुए वो गेंद उनके बल्ले पर लगी ही नहीं थी।


पारी का 21वां रन लेते ही द्रविड़ टेस्ट क्रिकेट में 13 हजार रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज हो गए। द्रविड़ के आगे केवल सचिन तेंदुलकर हैं। तेंदुलकर के टेस्ट क्रिकेट में 15 हजार से ज्यादा रन है।


वेस्टइंडीज की पहली पारी 590 रन बनाकर ऑलआउट
इससे पहले वेस्टइंडीज ने डरेन ब्रावो (166) की शानदार पारी की बदौलत पहली पारी में 590 रन बनाए। दूसरे दिन के नाबाद बल्लेबाज फिडेल एडवडर्स और देवेंद्र बीशु तीसरे दिन बल्लेबाजी करने मैदान पर उतरे लेकिन अश्विन ने जल्द ही बीशु को बोल्ड कर दिया। बीशु ने 12 रन बनाए जबकि एडवडर्स 11 रन बनाकर नाबाद रहे।


भारत की ओर से रविचंद्रन अश्विन ने पहली पारी में पांच विकेट झटके। वरुण एरॉन को तीन सफलता मिली। प्रज्ञान ओझा और इशांत शर्मा को एक-एक सफलता मिली है। मेहमान टीम ने अंतिम सत्र में पांच विकेट गंवाए।


ब्रावो के नेतृत्व में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने पहले और दूसरे दिन सपाट पिच पर बल्लेबाजी का शानदार नमूना पेश किया। ब्रावो ने 284 गेंदों की अपनी पारी में 17 चौके लगाए। उनके अलावा सलामी बल्लेबाज एड्रियन बाराथ ने 62, क्रेग ब्राथवेट ने 68, किर्क एकवडर्स ने 86, केरेन पॉवेल ने 81 और मार्लन सैमुएल्स ने 61 रनों का योगदान दिया।


लारा-ब्रावो में अनूठी समानता


जूनियर ब्रायन लारा कहे जाने वाले ब्रावो अपने 13वें टेस्ट में 166 रन पर आउट हो गए। लारा भी अपने 13वें टेस्ट में 167 रन पर आउट हुए थे। इससे पहले 12 टेस्ट मैचों तक दोनों बल्लेबाजों का बल्लेबाजी आंकड़ा यानि रन और औसत और शतक एकदम बराबर थे।
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यूं ही नहीं मिला ‘दीवार’ और ‘मिस्टर भरोसेमंद’ का तमगा

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‘दीवार’ और ‘मिस्टर भरोसेमंद’ जैसे कई विशेषणों से नवाजे जा चुके भारतीय क्रिकेट टीम के धुरंधर बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने टेस्ट मैचों में 13,000 रनों का आंकड़ा पार कर लिया है। इस मुकाम पर पहुंचने वाले वह भारत के ही नहीं बल्कि दुनिया के दूसरे बल्लेबाज हैं।


यही नहीं, इस सत्र में 1000 रनों का आंकड़ा पार करने वाले द्रविड़ एकमात्र बल्लेबाज हैं। द्रविड़ ने इस सत्र में इंग्लैंड के इयान बेल के बराबर पांच शतक लगाए हैं, जो 38 वर्ष की उम्र में उनके बल्ले की चमक दिखाने के लिए काफी हैं। ये आंकड़े यह साबित करने के लिए काफी है कि आखिर क्यों इस महान बल्लेबाज को क्रिकेट के जानकार अनेक विशेषणों से नवाजते हैं।


द्रविड़ ने वेस्टइंडीज के साथ वानखेड़े स्टेडियम में जारी तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन 21 रनों का व्यक्तिगत योग पार करते ही 13,000 रन पूरे किए। वह अब तक कुल 13061 रन बना चुके हैं। द्रविड़ पहली पारी में 82 रन बनाकर आउट हुए। वर्ष 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में अपने टेस्ट करियर का आगाज करने वाले द्रविड़ ने अब तक 160 मैचों की 277 पारियों में 32 बार नाबाद रहते हुए 53.31 के औसत से रन बटोरे हैं। उनके नाम 36 शतक और 63 अर्धशतक दर्ज हैं।


भारतीय टीम के कप्तान रह चुके द्रविड़ से अधिक रन सिर्फ भारत के सचिन तेंदुलकर ने बनाया है। सचिन के नाम 15086 रन दर्ज हैं। सचिन ने द्रविड़ की तुलना में छह वर्ष पहले अपना करियर शुरू किया था लेकिन रनों के मामले में द्रविड़ विश्व के महानतम बल्लेबाज माने जाने वाले सचिन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते दिख रहे हैं।


शतकों की दौड़ में द्रविड़ बेशक सचिन से पीछे हैं लेकिन भारत की ओर से दूसरा सबसे अधिक शतक लगाने वाला बल्लेबाज होना इस बात की पुष्टि करता है कि द्रविड़ मैदान में सचिन से किसी मामले में कम नहीं। द्रविड़ ने टेस्ट मैचों में अब तक कुल 36 शतक लगाए हैं जबकि सचिन के नाम 51 शतक हैं।


जहां तक अर्धशतकों की बात है तो द्रविड़ और सचिन कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। द्रविड़ और सचिन अब तक टेस्ट मैचों में 63-63 अर्धशतक लगा चुके हैं। यह एक नया रिकार्ड है। आस्टे्रलिया के पूर्व कप्तान एलन बार्डर भी 63 अर्धशतक लगा चुके हैं।


द्रविड़ और सचिन सहित कुल आठ बल्लेबाज अब तक टेस्ट मैचों में 10 हजार या उससे अधिक रन बना चुके हैं। इनमें तीन बल्लेबाज भारत के हैं। भारत के तीसरे बल्लेबाज सुनील गावस्कर हैं, जिनके नाम 10122 रन दर्ज हैं।


आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग (12557) इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं जबकि दक्षिण अफ्रीका के जैक्स कैलिस ने अब तक 12005 रन बनाए हैं। वह तालिका में चौथे क्रम पर हैं। कैलिस के बाद वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान ब्रायन लारा का नाम आता है, जिनके नाम 11953 रन हैं जबकि बार्डर ने 11174 रन बनाए हैं। इसके बाद स्टीव वॉ का नाम है, जिनके खाते में 10927 रन हैं।

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